IRCTC घोटाला: बिहार चुनाव से पहले लालू परिवार की बढ़ी मुश्किलें

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को IRCTC घोटाले में आरोपी माना है। अब इस मामले में तीनों के खिलाफ मुकदमा चलेगा। कोर्ट ने साफ कहा कि टेंडर प्रक्रिया में लालू यादव का सीधा हस्तक्षेप था और इस पूरे खेल से लालू परिवार को फायदा हुआ।

यह मामला उस वक्त का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। CBI के अनुसार, साल 2005-06 में उन्होंने IRCTC के दो होटल, एक रांची में और दूसरा पुरी में को कोचर बंधुओं की कंपनी को लीज पर देने का फैसला किया। आरोप है कि इसके बदले में कोचर ने पटना में लालू परिवार से जुड़ी कंपनी को 3 एकड़ जमीन बेहद सस्ते दाम पर दी।

7 जुलाई 2017 को CBI ने इस मामले में FIR दर्ज की थी और लालू समेत पांच लोगों के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। 16 अप्रैल 2018 को लालू, राबड़ी और तेजस्वी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। अब जाकर कोर्ट ने कहा है कि इन तीनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और मुकदमा चलेगा।

FIR के मुताबिक, जब IRCTC बोर्ड ने ये होटल कोचर की कंपनी DMCL को सौंपे, उसी दिन यह डील फाइनल की गई थी। आरोप है कि यह पूरा टेंडर प्रोसेस हेराफेरी से भरा था। IRCTC के उस समय के MD पंकज गोयल पर भी सवाल उठे थे कि उन्होंने टेंडर की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी।

CBI का कहना है कि यह सब लालू यादव की जानकारी और मंजूरी से हुआ। तब रेल मंत्रालय ने BNR होटल्स को IRCTC को ट्रांसफर किया था ताकि उन्हें आगे निजी कंपनियों को लीज पर दिया जा सके। इसी दौरान सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड (जो कोचर की कंपनी थी) को यह ठेका मिल गया।

25 फरवरी 2005 को पटना के बेली रोड स्थित 3 एकड़ जमीन DMCL को सिर्फ 1.47 करोड़ रुपए में दी गई, जबकि उसकी बाजार कीमत करीब 1.93 करोड़ रुपए थी। CBI का आरोप है कि यह डील “लैंड के बदले ठेका” देने के लिए की गई थी। यानी होटल का ठेका सस्ते में देकर बदले में जमीन ली गई।

CBI की जांच में यह भी सामने आया कि 2010 से 2014 के बीच यह जमीन एक बेनामी कंपनी के जरिए लालू परिवार की संपत्ति में जोड़ी गई। इस दौरान इसकी कीमत करीब 32 करोड़ रुपए पहुंच गई, जबकि जमीन की असली कीमत उस वक्त 94 करोड़ रुपए से अधिक थी।

कोर्ट में पेशी के दौरान लालू यादव व्हीलचेयर पर नजर आए। उनके साथ राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव भी मौजूद थे। जब कोर्ट ने राबड़ी से पूछा कि क्या वह आरोप स्वीकार करती हैं, तो उन्होंने कहा, “मैं किसी साजिश या धोखाधड़ी में शामिल नहीं हूं।” तेजस्वी ने भी कहा कि आरोप गलत हैं।

अब जब बिहार चुनाव नजदीक हैं, यह फैसला RJD के लिए सिरदर्द बन गया है। विरोधी दल इस मुद्दे को चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी में हैं। लालू परिवार पहले से ही ‘लैंड फॉर जॉब्स’ केस का सामना कर रहा है, और अब IRCTC घोटाले में आरोप तय होने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

साफ है कि यह मामला सिर्फ टेंडर घोटाले का नहीं बल्कि राजनीति और सत्ता के दुरुपयोग की कहानी भी है जो चुनावी माहौल में RJD के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

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